ट्रांसफरी पेंडेंट लाइट का अधिकार नहीं है डिक्री के निष्पादन को रोकने का

shivsankar
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Law, Supreme Court

परिचय

भारतीय न्यायपालिका में एक महत्वपूर्ण निर्णय आया है, जिसमें ट्रांसफरी पेंडेंट लाइट के अधिकारों पर विचार किया गया है। ट्रांसफरी पेंडेंट लाइट का अर्थ है कि जब कोई व्यक्ति किसी संपत्ति को खरीदता है या हस्तांतरित करता है, जबकि उस संपत्ति से संबंधित कोई मामला अदालत में लंबित हो। इस निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ट्रांसफरी पेंडेंट लाइट को डिक्री के निष्पादन को रोकने का अधिकार नहीं है।

न्यायिक निर्णय का महत्व

यह निर्णय भारतीय न्यायपालिका के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, क्योंकि यह संपत्ति के हस्तांतरण और डिक्री के निष्पादन से संबंधित मामलों में स्पष्टता प्रदान करता है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा है कि ट्रांसफरी पेंडेंट लाइट को डिक्री के निष्पादन को रोकने का अधिकार नहीं है, क्योंकि यह संपत्ति के हस्तांतरण के समय लंबित मामले के परिणाम से बंधा हुआ है।

संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम की धारा 52

संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम की धारा 52 में लिस पेंडेंस के सिद्धांत का वर्णन किया गया है। लिस पेंडेंस का अर्थ है कि जब कोई व्यक्ति किसी संपत्ति को खरीदता है या हस्तांतरित करता है, जबकि उस संपत्ति से संबंधित कोई मामला अदालत में लंबित हो, तो वह व्यक्ति उस मामले के परिणाम से बंधा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा है कि लिस पेंडेंस का सिद्धांत ट्रांसफरी पेंडेंट लाइट को डिक्री के निष्पादन को रोकने का अधिकार नहीं देता है।

विशिष्ट राहत अधिनियम की धारा 19(b)

विशिष्ट राहत अधिनियम की धारा 19(b) में कहा गया है कि जब कोई व्यक्ति किसी संपत्ति को खरीदता है या हस्तांतरित करता है, जबकि उस संपत्ति से संबंधित कोई मामला अदालत में लंबित हो, तो वह व्यक्ति उस मामले के परिणाम से बंधा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा है कि विशिष्ट राहत अधिनियम की धारा 19(b) लिस पेंडेंस के सिद्धांत को प्रभावित नहीं करती है।

निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय संपत्ति के हस्तांतरण और डिक्री के निष्पादन से संबंधित मामलों में स्पष्टता प्रदान करता है। ट्रांसफरी पेंडेंट लाइट को डिक्री के निष्पादन को रोकने का अधिकार नहीं है, क्योंकि यह संपत्ति के हस्तांतरण के समय लंबित मामले के परिणाम से बंधा हुआ है। यह निर्णय भारतीय न्यायपालिका के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, क्योंकि यह संपत्ति के हस्तांतरण और डिक्री के निष्पादन से संबंधित मामलों में स्पष्टता प्रदान करता है।

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