हेमोरेजिक और आइस्केमिक स्ट्रोक के परिणामों में अंतर

परिचय

स्ट्रोक एक गंभीर चिकित्सा स्थिति है जो मस्तिष्क को प्रभावित करती है और इसके परिणामस्वरूप व्यक्ति की जान जोखिम में पड़ सकती है। स्ट्रोक के दो मुख्य प्रकार होते हैं: हेमोरेजिक और आइस्केमिक। हेमोरेजिक स्ट्रोक तब होता है जब मस्तिष्क में रक्त वाहिका फट जाती है और रक्त मस्तिष्क के ऊतकों में जमा हो जाता है, जबकि आइस्केमिक स्ट्रोक तब होता है जब रक्त वाहिका संकुचित हो जाती है और मस्तिष्क को रक्त की आपूर्ति बंद हो जाती है। यूरोपीय मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, हेमोरेजिक और आइस्केमिक स्ट्रोक के परिणामों में काफी अंतर होता है।

इस लेख में, हम हेमोरेजिक और आइस्केमिक स्ट्रोक के परिणामों के बीच अंतर को समझने का प्रयास करेंगे और यह जानने का प्रयास करेंगे कि यह अंतर क्यों महत्वपूर्ण है।

हेमोरेजिक स्ट्रोक

हेमोरेजिक स्ट्रोक तब होता है जब मस्तिष्क में रक्त वाहिका फट जाती है और रक्त मस्तिष्क के ऊतकों में जमा हो जाता है। यह स्ट्रोक का एक गंभीर प्रकार है और इसके परिणामस्वरूप व्यक्ति की जान जोखिम में पड़ सकती है। हेमोरेजिक स्ट्रोक के कारणों में उच्च रक्तचाप, मादक द्रव्यों का सेवन, और मस्तिष्क में रक्त वाहिका की दुर्बलता शामिल हो सकते हैं।

हेमोरेजिक स्ट्रोक के परिणामों में शामिल हो सकते हैं: स्थायी मस्तिष्क क्षति, शारीरिक विकलांगता, और मृत्यु। हेमोरेजिक स्ट्रोक का इलाज करने के लिए डॉक्टर अक्सर सर्जरी का उपयोग करते हैं ताकि मस्तिष्क में जमा हुए रक्त को निकाला जा सके।

आइस्केमिक स्ट्रोक

आइस्केमिक स्ट्रोक तब होता है जब रक्त वाहिका संकुचित हो जाती है और मस्तिष्क को रक्त की आपूर्ति बंद हो जाती है। यह स्ट्रोक का एक सामान्य प्रकार है और इसके परिणामस्वरूप व्यक्ति की जान जोखिम में पड़ सकती है। आइस्केमिक स्ट्रोक के कारणों में उच्च रक्तचाप, मधुमेह, और धूम्रपान शामिल हो सकते हैं।

आइस्केमिक स्ट्रोक के परिणामों में शामिल हो सकते हैं: स्थायी मस्तिष्क क्षति, शारीरिक विकलांगता, और मृत्यु। आइस्केमिक स्ट्रोक का इलाज करने के लिए डॉक्टर अक्सर दवाओं का उपयोग करते हैं ताकि रक्त वाहिका को खोला जा सके और मस्तिष्क को रक्त की आपूर्ति बहाल की जा सके।

परिणामों में अंतर

हेमोरेजिक और आइस्केमिक स्ट्रोक के परिणामों में काफी अंतर होता है। हेमोरेजिक स्ट्रोक के परिणामस्वरूप व्यक्ति की जान जोखिम में पड़ सकती है, जबकि आइस्केमिक स्ट्रोक के परिणामस्वरूप व्यक्ति को स्थायी मस्तिष्क क्षति हो सकती है।

एक अध्ययन के अनुसार, हेमोरेजिक स्ट्रोक के परिणामस्वरूप 30 दिनों में मृत्यु की दर 45.5% थी, जबकि आइस्केमिक स्ट्रोक के परिणामस्वरूप 30 दिनों में मृत्यु की दर 14.5% थी।

स्ट्रोक का प्रकार 30 दिनों में मृत्यु की दर
हेमोरेजिक स्ट्रोक 45.5%
आइस्केमिक स्ट्रोक 14.5%

इस अध्ययन से पता चलता है कि हेमोरेजिक स्ट्रोक के परिणामस्वरूप व्यक्ति की जान जोखिम में पड़ सकती है, जबकि आइस्केमिक स्ट्रोक के परिणामस्वरूप व्यक्ति को स्थायी मस्तिष्क क्षति हो सकती है।

निष्कर्ष

हेमोरेजिक और आइस्केमिक स्ट्रोक के परिणामों में काफी अंतर होता है। हेमोरेजिक स्ट्रोक के परिणामस्वरूप व्यक्ति की जान जोखिम में पड़ सकती है, जबकि आइस्केमिक स्ट्रोक के परिणामस्वरूप व्यक्ति को स्थायी मस्तिष्क क्षति हो सकती है। यह महत्वपूर्ण है कि व्यक्ति स्ट्रोक के लक्षणों को पहचाने और तुरंत चिकित्सा सहायता ले।

स्ट्रोक के परिणामों को कम करने के लिए, व्यक्ति को उच्च रक्तचाप, मधुमेह, और धूम्रपान जैसे जोखिम कारकों को नियंत्रित करना चाहिए। इसके अलावा, व्यक्ति को नियमित व्यायाम करना चाहिए, स्वस्थ आहार लेना चाहिए, और तनाव को कम करने के लिए तकनीकों का उपयोग करना चाहिए।

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