बजट 2026: पुरानी आयकर व्यवस्था को बंद किया जाएगा या नई व्यवस्था ही एकमात्र विकल्प होगी?

shivsankar
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Finance, Taxation

बजट 2026: आयकर व्यवस्था में बदलाव

बजट 2026 के आगमन से पहले, आयकर व्यवस्था में बदलाव की अफवाहें तेज हो गई हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि पुरानी आयकर व्यवस्था को बंद किया जा सकता है और नई व्यवस्था को एकमात्र विकल्प बनाया जा सकता है। लेकिन यह बदलाव क्या होगा और इसके परिणाम क्या होंगे?

पुरानी आयकर व्यवस्था में करदाताओं को अपनी आय के आधार पर कर देना होता था, जबकि नई व्यवस्था में करदाताओं को अपनी आय के अलावा अन्य कारकों जैसे कि निवेश, बचत और व्यय के आधार पर कर देना होता है। नई व्यवस्था में करदाताओं को अधिक लाभ मिल सकता है, लेकिन यह भी संभव है कि पुरानी व्यवस्था को बंद करने से करदाताओं को नुकसान हो सकता है।

कर सुधार और आर्थिक विकास

कर सुधार और आर्थिक विकास के बीच एक गहरा संबंध है। कर सुधार से सरकार को अधिक राजस्व मिल सकता है, जिसे वह आर्थिक विकास के लिए उपयोग कर सकती है। लेकिन कर सुधार के लिए यह जरूरी है कि सरकार करदाताओं को आकर्षित करने वाली नीतियों को लागू करे।

भारत में कर सुधार के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार ने कर दरों को कम करने और करदाताओं को अधिक लाभ देने के लिए कई कदम उठाए हैं। लेकिन अभी भी कई चुनौतियां हैं जिन्हें दूर करना होगा।

व्यक्तिगत आयकर में कटौती

व्यक्तिगत आयकर में कटौती एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। करदाताओं को अपनी आय के आधार पर कर देना होता है, लेकिन यदि आयकर में कटौती की जाए तो करदाताओं को अधिक लाभ मिल सकता है।

सरकार ने व्यक्तिगत आयकर में कटौती के लिए कई प्रयास किए हैं। उसने कर दरों को कम करने और करदाताओं को अधिक लाभ देने के लिए कई कदम उठाए हैं। लेकिन अभी भी कई चुनौतियां हैं जिन्हें दूर करना होगा।

निष्कर्ष

बजट 2026 में आयकर व्यवस्था में बदलाव की अफवाहें तेज हो गई हैं। पुरानी आयकर व्यवस्था को बंद किया जा सकता है और नई व्यवस्था को एकमात्र विकल्प बनाया जा सकता है। लेकिन यह बदलाव क्या होगा और इसके परिणाम क्या होंगे? कर सुधार और आर्थिक विकास के बीच एक गहरा संबंध है, और सरकार को करदाताओं को आकर्षित करने वाली नीतियों को लागू करना होगा। व्यक्तिगत आयकर में कटौती एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, और सरकार को इसे हल करने के लिए कई प्रयास करने होंगे।

कर दर पुरानी व्यवस्था नई व्यवस्था
5% 2.5 लाख से 5 लाख तक 2.5 लाख से 3 लाख तक
10% 5 लाख से 10 लाख तक 3 लाख से 6 लाख तक
20% 10 लाख से 20 लाख तक 6 लाख से 12 लाख तक

इस तालिका से पता चलता है कि पुरानी आयकर व्यवस्था और नई आयकर व्यवस्था में कर दरें और आय सीमाएं अलग-अलग हैं। पुरानी व्यवस्था में कर दरें अधिक हैं और आय सीमाएं अधिक हैं, जबकि नई व्यवस्था में कर दरें कम हैं और आय सीमाएं कम हैं।

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