भारत में जलवायु-लचीली कृषि की आवश्यकता क्यों है?

shivsankar
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Agriculture, Environment

परिचय

भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहां अधिकांश जनसंख्या कृषि पर निर्भर है। लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण कृषि क्षेत्र में कई चुनौतियां उत्पन्न हो रही हैं। तापमान में वृद्धि, वर्षा में अनियमितता, और अत्यधिक वर्षा जैसी घटनाएं फसलों को नुकसान पहुंचा रही हैं और खाद्य सुरक्षा को खतरा पहुंचा रही हैं। इस स्थिति में, जलवायु-लचीली कृषि की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

जलवायु-लचीली कृषि एक ऐसी प्रणाली है जो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और कृषि उत्पादन को स्थिर रखने में मदद करती है। यह प्रणाली किसानों को जलवायु परिवर्तन के अनुसार अपनी खेती की तकनीकों में बदलाव करने में मदद करती है, जैसे कि सिंचाई प्रणाली में सुधार, मौसम पूर्वानुमान का उपयोग, और फसल बीमा जैसी योजनाओं का लाभ उठाना।

जलवायु परिवर्तन के प्रभाव

जलवायु परिवर्तन के कारण कृषि क्षेत्र में कई प्रभाव देखे जा रहे हैं। तापमान में वृद्धि के कारण फसलों की वृद्धि दर में कमी आ रही है, जिससे उत्पादन में कमी हो रही है। वर्षा में अनियमितता के कारण सिंचाई प्रणाली में समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं, जिससे फसलों को पानी की कमी हो रही है। अत्यधिक वर्षा के कारण फसलों को नुकसान पहुंच रहा है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान हो रहा है।

जलवायु परिवर्तन के कारण किसानों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों को अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त प्रयास करने पड़ रहे हैं, जैसे कि फसल बीमा का लाभ उठाना और मौसम पूर्वानुमान का उपयोग करना। किसानों को अपनी खेती की तकनीकों में बदलाव करने के लिए प्रशिक्षण और समर्थन की आवश्यकता है।

जलवायु-लचीली कृषि के लाभ

जलवायु-लचीली कृषि के कई लाभ हैं। यह प्रणाली किसानों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में मदद करती है, जिससे कृषि उत्पादन में स्थिरता आती है। यह प्रणाली किसानों को अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त प्रयास करने में मदद करती है, जिससे किसानों को आर्थिक लाभ होता है।

जलवायु-लचीली कृषि के लिए सरकार और गैर-सरकारी संगठनों को मिलकर काम करने की आवश्यकता है। सरकार को किसानों को प्रशिक्षण और समर्थन प्रदान करने के लिए कार्यक्रमों का संचालन करना चाहिए। गैर-सरकारी संगठनों को किसानों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के बारे में जागरूक करने और उन्हें जलवायु-लचीली कृषि की तकनीकों में प्रशिक्षित करने के लिए कार्यक्रमों का संचालन करना चाहिए।

निष्कर्ष

जलवायु परिवर्तन के कारण कृषि क्षेत्र में कई चुनौतियां उत्पन्न हो रही हैं। जलवायु-लचीली कृषि एक ऐसी प्रणाली है जो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और कृषि उत्पादन को स्थिर रखने में मदद करती है। यह प्रणाली किसानों को जलवायु परिवर्तन के अनुसार अपनी खेती की तकनीकों में बदलाव करने में मदद करती है, जैसे कि सिंचाई प्रणाली में सुधार, मौसम पूर्वानुमान का उपयोग, और फसल बीमा जैसी योजनाओं का लाभ उठाना।

जलवायु-लचीली कृषि के लिए सरकार और गैर-सरकारी संगठनों को मिलकर काम करने की आवश्यकता है। सरकार को किसानों को प्रशिक्षण और समर्थन प्रदान करने के लिए कार्यक्रमों का संचालन करना चाहिए। गैर-सरकारी संगठनों को किसानों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के बारे में जागरूक करने और उन्हें जलवायु-लचीली कृषि की तकनीकों में प्रशिक्षित करने के लिए कार्यक्रमों का संचालन करना चाहिए।

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