परिचय
नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) पोस्ट ग्रेजुएट (PG) 2025 के लिए कट-ऑफ प्रतिशत में कमी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। यह याचिका नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन (NBE) और नेशनल मेडिकल कमिशन (NMC) के फैसले के खिलाफ थी, जिसमें NEET-PG 2025 के लिए कट-ऑफ प्रतिशत में कमी करने का निर्णय लिया गया था।
इस याचिका के जवाब में, सुप्रीम कोर्ट ने NBE और NMC को नोटिस जारी किया है, जिसमें उन्हें अपने फैसले के बारे में जवाब देने के लिए कहा गया है। यह मामला 13 फरवरी को सुनवाई के लिए तैयार है।
कट-ऑफ प्रतिशत में कमी का कारण
NEET-PG 2025 के लिए कट-ऑफ प्रतिशत में कमी करने का निर्णय NBE और NMC द्वारा लिया गया था। इस निर्णय के पीछे का कारण यह था कि पिछले वर्षों में NEET-PG परीक्षा में बैठने वाले उम्मीदवारों की संख्या में कमी आई थी, जिससे सीटों की उपलब्धता पर प्रभाव पड़ रहा था।
इसके अलावा, कुछ मेडिकल कॉलेजों में सीटों की कमी के कारण, NBE और NMC ने कट-ऑफ प्रतिशत में कमी करने का निर्णय लिया ताकि अधिक उम्मीदवारों को प्रवेश मिल सके।
विरोध और चुनौतियाँ
हालांकि, इस निर्णय का विरोध कई छात्रों और मेडिकल पेशेवरों द्वारा किया जा रहा है। उनका तर्क है कि कट-ऑफ प्रतिशत में कमी से परीक्षा की गुणवत्ता और मानकों पर प्रभाव पड़ेगा।
इसके अलावा, कुछ लोगों का तर्क है कि यह निर्णय अन्य प्रवेश परीक्षाओं के लिए एक गलत उदाहरण पेश करेगा और शिक्षा प्रणाली की गुणवत्ता को प्रभावित करेगा।
न्यायिक हस्तक्षेप
सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से इस मामले में एक नया मोड़ आया है। न्यायालय ने NBE और NMC को नोटिस जारी किया है और उन्हें अपने फैसले के बारे में जवाब देने के लिए कहा है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि न्यायालय इस मामले में क्या फैसला लेता है और क्या कट-ऑफ प्रतिशत में कमी को बरकरार रखा जाएगा या नहीं।
निष्कर्ष
NEET-PG 2025 के लिए कट-ऑफ प्रतिशत में कमी के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस एक महत्वपूर्ण विकास है। यह मामला शिक्षा प्रणाली और प्रवेश परीक्षाओं की गुणवत्ता पर प्रभाव डालेगा।
इस मामले के परिणाम का इंतजार किया जा रहा है और यह देखना दिलचस्प होगा कि न्यायालय का फैसला क्या होगा और इसका छात्रों और मेडिकल पेशेवरों पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
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