रुपये की स्थिति
भारतीय रुपये ने हाल ही में डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 92.02 को छुआ, लेकिन इसके बाद यह कुछ हद तक सुधार हुआ और 91.90 पर बंद हुआ। यह सुधार भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) के हस्तक्षेप के बाद हुआ, जिसने रुपये को और गिरने से रोकने के लिए बाजार में हस्तक्षेप किया।
इस महीने रुपये की स्थिति सबसे खराब रही है, जो पिछले 3 वर्षों में सबसे बड़ी गिरावट है। विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बाजार से पैसा निकालने और हेजिंग मांग बढ़ने के कारण रुपये पर दबाव बढ़ गया है।
आरबीआई की भूमिका
आरबीआई ने रुपये को स्थिर करने के लिए बाजार में हस्तक्षेप किया है। आरबीआई ने डॉलर बेचकर रुपये को समर्थन देने की कोशिश की है, जिससे रुपये की गिरावट को थामा जा सके। इसके अलावा, आरबीआई ने विदेशी मुद्रा बाजार में तरलता बढ़ाने के लिए कदम उठाए हैं, जिससे रुपये की स्थिति में सुधार हो सके।
आरबीआई के हस्तक्षेप के बाद, रुपये ने कुछ हद तक सुधार दिखाया है, लेकिन अभी भी यह डॉलर के मुकाबले कमजोर स्थिति में है। रुपये की स्थिति में सुधार के लिए आरबीआई को और अधिक कदम उठाने होंगे।
विदेशी निवेश और हेजिंग मांग
विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बाजार से पैसा निकालने के कारण रुपये पर दबाव बढ़ गया है। विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार और बॉन्ड बाजार से पैसा निकाला है, जिससे रुपये की मांग कम हो गई है।
इसके अलावा, हेजिंग मांग बढ़ने के कारण भी रुपये पर दबाव बढ़ गया है। विदेशी कंपनियों और निवेशकों ने अपने निवेश को सुरक्षित करने के लिए हेजिंग की मांग की है, जिससे रुपये की मांग बढ़ी है।
निष्कर्ष
रुपये की स्थिति अभी भी कमजोर है, लेकिन आरबीआई के हस्तक्षेप के बाद यह कुछ हद तक सुधार दिखा रही है। विदेशी निवेश और हेजिंग मांग के कारण रुपये पर दबाव बढ़ गया है, लेकिन आरबीआई को और अधिक कदम उठाने होंगे ताकि रुपये की स्थिति में सुधार हो सके।
रुपये की स्थिति को सुधारने के लिए सरकार और आरबीआई को मिलकर काम करना होगा। विदेशी निवेश को बढ़ावा देने और हेजिंग मांग को कम करने के लिए कदम उठाने होंगे। इसके अलावा, आरबीआई को विदेशी मुद्रा बाजार में तरलता बढ़ाने के लिए कदम उठाने होंगे ताकि रुपये की स्थिति में सुधार हो सके।
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