गंगा के दक्षिण तट पर मिलनें वाली यह एक बड़ी सहायक नदी है, जो अमरकंटक पठार से निकलती है| पठार के उत्तरी किनारे पर जलप्रपातों की श्रृंखला बनाती हुई यह नदी पटना से पश्चिम में आरा के पास गंगा नदी में विलीन हो जाती है|

ब्रह्मपुत्र नदी को ब्रह्मा की बेटी भी कहा जाता है| विश्व की सबसे बड़ी नदियों में से एक ब्रह्मपुत्र का उद्गम कैलाश पर्वत श्रेणी में मानसरोवर झील के निकट चेमायुंगडुग हिमनद में है|

यह नदी गैरसेन के निकट गढ़वाल की पहाड़ियों से निकलने वाली अपेक्षाकृत छोटी नदी है| अंत में कन्नौज के निकट यह गंगा नदी में मिल जाती है|

कोसी नदी गंगा नदी की सबसे बड़ी सहायक नदियों में से एक है| इसका उद्गम तिब्बत में माउंट एवरेस्ट के उत्तर में है, जहाँ से इसकी मुख्य धरा अरुण निकलती है|

चम्बल नदी यह नदी मध्य देश में महू के निकट जनापाव पहाड़ी से निकलती है ,जो समुद्र तल से 616 मीटर ऊँची है|

साबरमती नदी का उद्गम अरावली की पहाड़ियों में राजस्थान के डूंगरपुर जिले में स्थित है| यहाँ से यह दक्षिम-पश्चिम दिशा में 300 किमी० की दूरी तय करनें के पश्चात खम्भात की खाड़ी में विलीन हो जाती है|

कावेरी नदी कर्नाटक के कोगाडु जिले में ब्रह्मगिरि पहाड़ियों से निकलती है, यह मैसूर पठार में या नदी कई जल-प्रपात बनाती है जिनमें शिवासमुद्रम प्रसिद्ध है|

गोदावरी इस नदी को दक्षिण गंगा के नाम से भी जाना जाता है| यह महाराष्ट्र में नासिक जिले से निकलती है, और बंगाल की खाड़ी में जाकर गिरती है|

माही नदी नर्मदा और तापी के बाद यह गुजरात में तीसरी बड़ी नदी है, इस नदी की उत्पत्ति विन्ध्याचल पर्वत से होती है|

नर्मदा नदी अमरकंटक पठार के पश्चिमी पार्श्व से लगभग 1,057 मीटर की ऊँचाई से निकलती है|

दामोदर नदी छोटानागपुर पठार के पूर्वी किनारे पर बहती है, और भ्रंश घाटी से होती हुई हुगली नदी में गिरती है|

तापी नदी यह पश्चिम दिशा में बने वाली एक अन्य महत्त्वपूर्ण नदी है| यह मध्य प्रदेश में बेतूल जिले में मुलताई से निकलती है, तथा यह सूरत के निकट खम्भात की खाड़ी में विलीन हो जाती है|

लूनी नदी पुष्कर के समीप दो धाराओं सरस्वती और सागरमती के रूप में उत्पन्न होती है, जो गोबिंदगढ़ के निकट आपस में मिल जाती है|