असम के लोक- संस्कृति का मूलाधार असम का प्राकृतिक परिवेश और आजीविका को ही नहीं  बताता है  बल्कि  यह असम की रीति रिवाज को भी दर्शाता हैं।

महाभारत काल तक असम में अनार्य संस्कृति का प्रचलन था। उसके पहले आर्य का स्थायी निवास इस प्रांत में नहीं था।

असम के लोक- संस्कृति का इतिहास

अहोम वंश का शासन 1829 पर्यन्त तब तक बना रहा। जब तक कि अंग्रेजों ने उन्हे हरा दिया। कहा जाता है कि अहोम राजाओं के कारण ही इसका नाम असम पड़ा। 

असम का नाम कैसे पड़ा

वर्तमान समय में लोग टीन और ईट सीमेंट के मकान कर रहने लगें हैं जिसके कारण बाँस- फूस के घर लोक संस्कृति के पर्याय बन गए हैं।

असम मे घर कैसे होते हैं

असम को दुनिया भर में जाना जाता है अपने रेशम के लिए जिसका नाम असम सिल्क है। एरी नाम के अच्छे ऊन यहाँ देखने को मिल जाते हैं।

असम का व्यवसाय क्या है

असम में आपको भारतीय गर्म एवं शुष्क मौसम नहीं देखने को मिलता है। अगस्त के गर्म महीने में असम का तापमान मध्यम, लगभग 84 डिग्री फ होता है।

असम की जलवायु

असम तीनो साइड से नार्थ ईस्ट राज्यों से घिरा हुआ है। असम राज्य का चैत्रफल 78,523 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र तक फैला हुआ है।असम राज्य मैदानी और नदी घाटियों से मिलकर बना हुआ है।

असम का भौगोलिक रूप

असम में महिला व पुरुष के अलग-अलग पहनावे होते हैं. महिलाओं की ड्रेस में ऊपर का हिस्सा एक विशिष्ट प्रकार का चादर से ढका होता है।

असम के लोगो की वेशभूशा

उत्पादन के आधार पर आहार व खाद्य का निर्धारण होता हैं। असम में प्रचुर बारिश होती है। तो धान इस प्रांत का मुख्य अनाज हैं। अतः इस प्रांत में धान का उत्पादन अधिक होता है।

असम की आहार या भोजन क्या होता है

विवाह लोक गीत इस गीत को असमिया लोग ताली बजा कर शिव पार्वती राम और कृष्ण के साथ देवी -देवताओं के नाम कीर्तन करते है। 

असम का लोकप्रिय गीत कौन सा हैं

 एक साथ लाना एवं आपसी प्रेम भाव को बढ़ाना है। बिहू महोत्सव,रजनी गबरा,बैशगु,माजुली,देहिंग पटकाई महोत्सव यह कुछ असम के त्योहार हैं।

असम के त्योहार

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