सरकार की यह बड़ी चूक कहीं कोरोना विस्फोट का कारण न बने

भारत में कोरोना वायरस की जांच के लिए जो तरीका अपनाया जा रहा है वह फुलप्रूफ नहीं है| ऐसा लगता है कि सरकार द्वारा की जा रही कुछ गलतियों के कारण देश को भारी खामियाजा भुगतना पड़ सकता है|

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ICMR द्वारा जारी प्रक्रिया के तहत,जांच करने से पहले आपको हेल्प लाइन पर फोन करना होता है जहां आप से सवाल किए जाते हैं जैसे-विदेश की यात्रा की है या किसी ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आए हैं कि विदेशी से लौटा हो अथवा किसी ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आए हो जो कोरोना पॉजिटिव है|

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भारत में कोरोना वायरस की जो हमारे द्वारा जारी जो तरीका है उसके तहत उन्हीं का कोरोना जांच किया जा रहा है जो विदेश की यात्रा की है या किसी ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आए हैं कि विदेशी से लौटा हो अथवा किसी ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आए हो तो कोरोना पॉजिटिव है|

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सैद्धांतिक रूप से देखा जाए तो यह तरीका सही लगता है और अनुकूल मालूम पड़ता है परंतु वह व्यावहारिक रूप से इस तरीके में दो बड़ी कमियां हैं |

पहला यह कि हर व्यक्ति इस पूरी प्रक्रिया को समान रूप से गंभीरता से नहीं ले रहा है|दूसरा यह कि पूरी व्यवस्था उस व्यक्ति की सजगता पर छोड़ दी गई है|

उदाहरण के लिए जो लोग मार्च के प्रारंभिक हफ्तों में कोरोना प्रभावित देशों की यात्रा से आए हैं उनमें से बहुत तब अपनी जांच करवाने पहुंच रहे हैं जब उनके अंदर कोरोना के लक्षण दिखने लग रहे हैं और तब तक इस वायरस न जाने कितने लोगों को उनके द्वारा फैल चुका हो रहा है|

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हालांकि भारत के सामने इतनी बड़ी आबादी की जांच करना भी एक बड़ी चुनौती है | अतः जिसके कारण मजबूरी में सरकार को यह प्रक्रिया अपनानी पड़ रही है | फिर भी सरकार द्वारा अपनाई गई है प्रक्रिया एक बड़ी चूक साबित हो सकती है|