इमोशनल कर देगी प्रज्ञानंद और मां की स्टोरी – देश ही नहीं विदेश में भी रखती है हर चीज का खास ध्यान……

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R Praggnanandhaa : इन दिनों एक नाम सबके जुबान पर है। यह नाम अब कोई साधारण नहीं रहा है। साधारण सा दिखने वाला 18 साला का प्रज्ञानंद (Praggnanandhaa ) ने इतिहास रच दिया है। आज हर तरफ इनकी चर्चा हो रही है। सतरंज खिलाड़ी के आर प्रज्ञानंद का मुकाबला दुनिया के नंबर 1 चेस खिलाड़ी ग्रैंडमास्टर मैग्नस कार्लसन (Grandmaster Magnus Carlsen) से हुआ।

प्रज्ञानंद इस मुकाबले में कार्लसन से हारे जरूर लेकिन हर कोई इनका ही नाम ले रहा है। मात्र 18 साल का लड़का विश्व के दूसरे और तीसरे नंबर के चेस खिलाड़ी को हरा कर खुद दुनिया भर में दूसरा स्थान हासिल कर लिया है। इसी बीच इनसे जुड़ी कई कहानी सामने आ रही है, जिसे लोग दिलचस्पी के साथ पढ़ और सुन रहे हैं। आइए जानते हैं कि प्रज्ञानंद की मां बेटे के साथ विदेश यात्रा में स्टोव और बर्तन लेकर क्यों जाती हैं।

टीवी देखने की थी आद

प्रज्ञानंद (Chess player Praggnanandhaa  ) मात्र 18 साल के हैं। प्रज्ञानंद के इस सफर में उनकी मां हमेशा उनके साथ रहीं। प्रज्ञानंद की बहन वैशाली भी शतरंज की अच्छी खिलाड़ी हैं। पहले दोनों भाई-बहन खूब टीवी देखते थे। मां ने फिर चेस क्लास में दाखिला करवा दिया। फिर जो हुआ वो सबके सामने है।

मां-बेटे की एक तस्वीर भी खूब वायरल रही है। इस तस्वीर की एक कहानी यह भी है कि शतरंज के दिग्गज गैरी कास्पारोव ने भी इस पर ट्वीट किया था। प्रज्ञानंद की इस कामयाबी के बाद हर कोई सोशल मीडिया पर बढ़ाई देने से अपने आपको नहीं रोक पाया।

स्टोव और बर्तन लेकर मां साथ जाती है विदेश

दरअसल, प्रागनानंद ने फैबियानो कारूआना पर जीत हासिल कर FIDE वर्ल्ड कप के फाइनल में जगह बनाई थी। प्रज्ञानंद की मां अपने बेटे के साथ ही जाती हैं। वह अपने बेटे के लिए हर विदेश यात्रा पर अपने साथ एक स्टोव और स्टील के बर्तन ले जाती हैं, ताकि वह चावल और रसम बना सके।

नागलक्ष्मी ने एक बार कहा था-प्रज्ञानंद के खेल के मैदान इतने शांत हैं कि मुझे हमेशा डर लगता है कि लोग मेरे दिल की तेज़ धड़कनों को सुन न लें। मैं किसी भी खेल के दौरान अपने बेटे से नज़र नहीं मिलाता क्योंकि मैं नहीं चाहती कि उसे पता चले कि मुझे पता है कि वह कैसा महसूस कर रहा है।

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