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तीन महीने की छोटी सी अवधि के भीतर ही, कुल १०० गायों, बछड़ोंऔर बैलों को आश्रय दिया जा चुका है

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हमारे गुरु योगी अश्विनीजी की कृपा से , सरयू नदी के तट
पर, लावारिस गायों और आवारा पशुओं के लिए२ अक्टूबर, २०१६ के

दिन,  गोरखपुर गौशाला का उद्घाटन

किया गया। इस गौशाला का नाम ‘ योगी अश्विनी गौशाला” रखा गया है और वह  तेहशील, गोला बाज़ार, जिलाआ गोरखपुर के नराहण गांव में स्थित है।unnamed-6

तीन महीने की छोटी सी अवधि के भीतर ही, कुल १०० गायों, बछड़ोंऔर बैलों को आश्रय दिया जा चुका है। ध्यान फाउंडेशन इन असहाय लावारिस पशुओं की सभी जरूरतोंऔर व्ययों कि देखभाल करता है यह  पूर्वी उत्तर प्रदेश में एक बहुत ही उतम औरअनूठी पहल है। इस इलाके के सभी क्षेत्रों में इसकी सराहना की जारही है |गौशाला कुल २ एकड़ भूमी के क्षेत्र में फैला हुअा है और  ५० आम के ऑर्किड द्वारा घिरा हुआ है।

योगी अश्विनी, एक योग गुरु तथा ध्यान फाउंडेशन के मार्गदर्शक हैं जो,तंत्र, योग, आध्यात्मिक चिकित्सा, मन्त्र, यज्ञ, पूर्वजन्म के दर्शन,  वैदिक युद्ध कलाएँ आदि विभिन्न प्रकार के आध्यात्मिक विज्ञान के पूर्णज्ञाता हैं। एक सफल व्यवसाय, अर्थशास्त्र में आनर्स तथा मैनेजमेंट मेंमास्टर्स की डिग्री होने के साथ साथ, वह  प्राचीन ऋषियों की परम्परा केअनुसार योग की साधना कर रहे हैं और उसका ज्ञान, बिना किसीसंशोधन के, जैसा कि हज़ारों वर्ष पूर्व ऋषियों द्वारा दिया गया था, विश्वभर में विस्तृत कर रहे हैं

वह एक प्रख्यात लेखक और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के एक प्रशंसित वक्ता हैंजिन्होनें, योग और उससे जुड़े सभी विषयों पर विश्वप्रसिद्ध पुस्तकें लिखीहैं तथा समय – समय पर दैनिक समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में उनकेलेख छपते रहते हैं। वह मासिक पत्रिका ‘ द इनर वर्ल्ड ‘ के मानद संपादकभी हैं जिसमें योग विज्ञान, तंत्र, वास्तु, आयुर्वेद, आत्मिक उपचार आदिकी जानकारी दी जाती है।

हिमालय के योगिओं का सानिध्य तथा वर्षों की मौन साधना के बाद, एकदशक से भी अधिक समय तक ‘ प्राणी ‘ के अस्तित्व का अध्य्यन एवंकई वैदिक तकनीकों के मिश्रण के उपरांत, योगी जी ने आधुनिक मनुष्यके लिए ‘ सनातन क्रिया’ तैयार की है। इसमें ऋषि पतञ्जलि द्वारा दिएगए अष्टाँग योग के सभी आठ अंगों का सार है।

पचास वर्ष से अधिक आयु में भी, तेज, आकर्षण और अद्भुत शक्ति सेओत – प्रोत उनका व्यक्तित्व तथा उनकी उपस्थिति में होने वालेआध्यात्मिक अनुभव इस क्रिया की प्रभावकारिता के पर्याप्त प्रमाण हैं।देश के प्रमुख डॉक्टर भी सनातन क्रिया की शक्ति और उसके प्रभावों केसाक्षी हैं और उसके अभ्यास से दुनिया भर में, लोगों ने भौतिक संतुलनऔर आत्मिक उत्थान का लाभ उठाया है।

निरीह पशु हो या पीड़ित मनुष्य सभी के लिए, योगीजी के ह्रदय -द्वारखुले हैं। नियमित रूप से लंगर की व्यवस्था, वन्य जीव तथा आवारापशुओं का संरक्षण, घायल पशुओं की देखभाल, गरीब बच्चों के लिएशिक्षा, भोजन और वस्त्र आदि की सुविधाएँ, स्त्रियों को रोज़गार केप्रशिक्षण, गरीब और नेत्रहीनों की उच्च शिक्षा के प्रबंध, पर्यावरण के प्रतिजागरूकता, आदि धर्मार्थ कार्यों में वह निस्वार्थ समर्पित हैं ।

ध्यान फाउंडेशन, एक आध्यात्मिक और धर्मार्थ  संस्था है जो दुनिया भरमें निशुल्क, गुरु – शिष्य परम्परा के अनुसार, योग विद्या के मूल एवंप्रमाणिक मार्ग के संदेश को प्रचारित करने के लिए समर्पित है जैसा किहज़ारों वर्ष पूर्व ऋषि पतंजलि द्वारा निर्धारित किया गया था। यह संस्थापूर्ण रूप से स्वयंसेवकों द्वारा संचालित है जो दिन – रात, इस सृष्टि मेंधर्म का पालन कर रहे हैं। जीवन के सभी क्षेत्रों से आये यह स्वयं सेवक -डॉक्टर, पत्रकार, डिज़ाइनर, वकील, विद्वान्, गृहणियाँ, व्यापारी  आदि,बिना किसी पारिश्रमिक के, दिव्य पुरुष एवं योग साधक अश्विनिजी केद्वारा प्रेरित, सेवा और साधना के पथ पर अग्रसर हैं।

२००२ में स्थापित यह फाउंडेशन, दुनिया भर में, आज एक मिसाल बनगयी है। देश – विदेश में, योग विद्या में संलग्न इस फाउंडेशन में कुछ भीसिखाने के लिए न ही शुल्क लिया जाता है और न ही किसी प्रकर काव्यापारिक लेन – देन होता है।सभी प्रकार की धर्मार्थ सेवा किसी सरकारीमदद या कोई उत्पाद की बिक्री के द्वारा नहीं होती बल्कि पूरी तरह सेयोगी अश्विनि और स्वयंसेवकों के योगदान से होती है।

अधिक जानकारीके लिए www.dhyanfoundation.com पर संपर्क कर सकते हैं।

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