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All posts by Mani Dubey

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‘छेरछेरा’ छत्तीसगढ़िया त्योहार

 छत्तीसगढ़ में छेरछेरा पर्व का विशेष महत्व है , यह इस बार जनवरी माह की 2 तारीख को मनाया गया  इस दिन बच्चे घरघर जाकर “छेरछेरा छेरछेरा कोठी का धान ला, हेर हेरा हेर हेरा” कहते हुए सबके सब से त्यौहारी ग्रहण करते हैं। छत्तीसगढ़

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अर्जुन का सैन्य परिक्षण, गाण्डीव की विशेषता 

अर्जुन उवाचः अथ व्यवस्थितान्दृष्ट्वा धार्तराष्ट्रान्‌ कपिध्वजः ।प्रवृत्ते शस्त्रसम्पाते धनुरुद्यम्य पाण्डवः ॥ arjuna uvācaatha vyavasthitān dṛṣṭvā dhārtarāṣṭrānkapidhvajaḥ.pravṛttē śastrasaṅpātē dhanurudyamya pāṇḍavaḥ৷৷1.20৷৷हृषीकेशं तदा वाक्यमिदमाह महीपते । सेनयोरुभयोर्मध्ये रथं स्थापय मेऽच्युत ॥hṛṣīkēśaṅ tadā vākyamidamāha mahīpatē.sēnayōrubhayōrmadhyē rathaṅ sthāpaya mē.cyuta৷৷1.21৷৷ भावार्थ : भावार्थ :  हे राजन्‌! इसके बाद कपिध्वज अर्जुन ने मोर्चा बाँधकर डटे हुए

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दोनों सेनाओं की शंख-ध्वनि का वर्णन

तस्य सञ्जनयन्हर्षं कुरुवृद्धः पितामहः । सिंहनादं विनद्योच्चैः शंख दध्मो प्रतापवान्‌ ॥ tasya saṅjanayanharṣaṅ kuruvṛddhaḥ pitāmahaḥ.siṅhanādaṅ vinadyōccaiḥ śaṅkhaṅ dadhmau pratāpavān৷৷1.12৷৷ भावार्थ :  कौरवों में वृद्ध बड़े प्रतापी पितामह भीष्म ने उस दुर्योधन के हृदय में हर्ष उत्पन्न करते हुए उच्च स्वर से सिंह की दहाड़ के समान

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अर्जुनविषादयोग ~ भगवत गीता ~ अध्याय एक – Bhagwat Geeta Chapter 1

अथ प्रथमोऽध्यायः- अर्जुनविषादयोग दोनों सेनाओं के प्रधान शूरवीरों और अन्य महान वीरों का वर्णन धृतराष्ट्र उवाच धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः । मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत संजय ॥1-1॥ dhṛtarāṣṭra uvācadharmakṣētrē kurukṣētrē samavētā yuyutsavaḥ.māmakāḥ pāṇḍavāścaiva kimakurvata sañjaya৷৷1.1৷৷ भावार्थ : धृतराष्ट्र बोले- हे संजय! धर्मभूमि कुरुक्षेत्र में एकत्रित, युद्ध की

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मधुशाला : बिहार संस्करण, (हरिवंशराय ‘बच्चन’ की स्मृति में)

पटना छपरा दरभंगा तक सूख गया रस का प्याला हाजीपुर के पुल पर केले अब बेच रही है मधुबाला महफिल  अब  वीरान  हुई और नाच खतम नागिन वाला बुझे बुझे अब लगे बराती मस्ती  पर  डाका  डाला घर-घर जाकर सूँघ रहा है मुखड़ा सबका पुलिसवाला

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श्री बजरंग बाण

दोहा : निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान। तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥ चौपाई : जय हनुमंत संत हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥ जन के काज बिलंब न कीजै। आतुर दौरि महा सुख दीजै॥ जैसे कूदि सिंधु महिपारा। सुरसा बदन

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​लोकतंत्र के दल-तंत्र में बदल जाने के खतरे

भारत दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में गिना जाता है जहां चुनाव किसी पर्व से कम नहीं होते गजब का शोर गजब की भीड़, हर प्रकार की आकांक्षाएं और  महत्वकांक्षाएं। बदलते समय के साथ चुनाव का स्वरूप भी बदल चुका है, उम्मीदवारों के घर-घर जाकर

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राष्ट्रवादी बाइक और यादों का रिफाइंड

भारत की सीमाओं पर खड़ा एक सैनिक ना जाने क्या-क्या बलिदान कर देता है हमारी देश की रक्षा के लिए । महीनों घर नहीं आता, जान दांव पर लगा देता है, शारीरिक कष्ट, अकेलापन और कई बार सरकार की बेरुखी। मगर इन सब के बाद