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All posts by Mani Dubey

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भारत की प्रथम महिला शिक्षिका, सावित्रीबाई ज्योतिराव फुले

सावित्रीबाई ज्योतिराव फुले (3 जनवरी 1831 – 10 मार्च 1897) भारत की प्रथम महिला शिक्षिका, समाज सुधारिका एवं मराठी कवयित्री थीं। उन्होंने अपने पति ज्योतिराव गोविंदराव फुले के साथ मिलकर स्त्रियों के अधिकारों एवं समानता पर कार्य किए। सावित्रीबाई भारत के प्रथम कन्या विद्यालय में प्रथम महिला शिक्षिका थीं। उन्हें आधुनिक मराठी काव्य की अग्रदूत माना जाता है। 1852 में उन्होंने सर्वसमाज की बालिकाओं के लिए एक विद्यालय की स्थापना की। ज्ञात हो को इस दौर में बालिकाओ के पढने को धर्मशास्त्रों में घोर पाप माना जाता था। पर अफ़सोस की महिलाये ही नही जानती की आज ओ किनके बदौलत पढ़ लिख रही हैं।

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सुंदर कविता -Busy Busy काय करता

Busy Busy काय करता वेळ काढा थोडा आयुष्यभर चालूच असतो संसाराचा गाडा खूप काम, रजा नाही मिटिंग, टार्गेट,फाईल अरे वेड्या यातच तुझं आयुष्य संपून जाईल नम्रपणे म्हण साहेबांना दोन दिस रजेवर जातो फॉरेन टूर राहिला निदान जवळ फिरून येतो आज पर्यंत ऑफिससाठी किती किती राबलास

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गोरखपुर- डॉ. कफील के भाई कासिफ जमील पर जानलेवा हमला.

गोरखपुर- डॉ. कफील के भाई कासिफ जमील पर जानलेवा हमला. गोरखनाथ पुल से उतरते समय हमलावरों ने तीन राउंड फायर किये । गंभीर हालत में अस्पलात में भर्ती भारत को बेहतर समझने और हमारी परम्पराओं को देश दुनिया तक पहचाने के हमारे इस प्रयास को

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शतरंज के खिलाड़ी

वाजिदअली शाह का समय था। लखनऊ विलासिता के रंग में डूबा हुआ था। छोटे-बड़े, गरीब-अमीर सभी विलासिता में डूबे हुए थे। कोई नृत्य और गान की मजलिस सजाता था, तो कोई अफीम की पीनक ही में मजे लेता था। जीवन के प्रत्येक विभाग में आमोद-प्रमोद

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कुतुबुद्दीन की मौत 

इतिहास की किताबो में लिखा है कि उसकी मौत पोलो खेलते समय घोड़े से गिरने पर से हुई. ये अफगान / तुर्क लोग “पोलो” जैसा खेल खेलते थे जिसे बुजकशी कहते हैं जिसमे एक बकरे को मारकर उसे लेकर घोड़े पर भागते है, जो उसे

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एक आशीर्वाद / दुष्यंत कुमार

जा तेरे स्वप्न बड़े हों। भावना की गोद से उतर कर जल्द पृथ्वी पर चलना सीखें। चाँद तारों सी अप्राप्य ऊचाँइयों के लिये रूठना मचलना सीखें। हँसें मुस्कुराएँ गाएँ। हर दीये की रोशनी देखकर ललचायें उँगली जलाएँ। अपने पाँव पर खड़े हों। जा तेरे स्वप्न

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कोशिश करने वालों की हार नहीं होती- सोहन लाल द्विवेदी

कई लोग इस रचना को हरिवंशराय बच्चन जी द्वारा रचित मानते हैं। लेकिन श्री अमिताभ बच्चन ने अपनी एक फ़ेसबुक पोस्ट में स्पष्ट किया है कि यह रचना सोहनलाल द्विवेदी जी की है। लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती कोशिश करने वालों की

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मुक्तक- दुष्यंत कुमार

(१) सँभल सँभल के’ बहुत पाँव धर रहा हूँ मैं पहाड़ी ढाल से जैसे उतर रहा हूँ मैं क़दम क़दम पे मुझे टोकता है दिल ऐसे गुनाह कोई बड़ा जैसे कर रहा हूँ मैं। (२) तरस रहा है मन फूलों की नई गंध पाने को

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अंधेरी गुफा की अंधी मछलियों नें अद्भुत बनाया कुटुमसर को

बस्तर पहुंचने वाले 55 हजार से अधिक देशी- विदेशी पर्यटकों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण होता है कोटमसर व कैलाश गुफाओं को देखना।  क्यों प्रसिद्ध है कुटुमसर की गुफाकुटुमसर की गुफा जमीन से 55 फुट नीचे हैं। इनकी लंबाई 330 मीटर है। इस गुफा के

Sridevi

एक थी रुपहले पर्दे की देवी-श्रीदेवी 

           श्रीदेवी कपूर जन्म दिन : 13 Aug 1963 आयु : 54 मृत्यु: 24 फ़रवरी 2018 बॉलीवुड की मशहूर अदाकारा श्रीदेवी का निधन हो गया है. श्रीदेवी 54 साल की थीं. उन्होंने दुबई में आखिरी सांस ली. बताया जा रहा है