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All posts by Mani Harsh

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आईआईएम कोझिकोड और जल स्वावलम्बन

आईआईएम कोझिकोड और जल स्वावलम्बन editorial Wed, 07/25/2018 – 17:36 Source द वाटर कैचर्स, 2017 //embedr.flickr.com/assets/client-code.js केरल का कोझिकोड सघन वर्षा का क्षेत्र है। साल में 300 मिलीमीटर से ज्यादा वर्षा होती है। लेकिन, कोझिकोड में नए जमाने की पढ़ाई करने के लिये बनाए गए

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गंगा के उद्गम में हरे पेड़ों को बचाने की मुहिम

गंगा के उद्गम में हरे पेड़ों को बचाने की मुहिम editorial Sun, 07/22/2018 – 18:28 Author सुरेश भाई रक्षा सूत्र आन्दोलन “ऊँचाई पर पेड़ रहेंगे, नदी ग्लेशियर टिके रहेंगे।” “चाहे जो मजबूरी होगी, सड़क सुक्की, जसपुर, झाला ही रहेगी” के नारों के साथ 18 जुलाई,

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अगर कोई तुम्हें बादल देता है / तो मैं बारिश दूँगा — प्रकाश के रे द्वारा अनुदित कवितायेँ

एक-से-बढ़कर-एक: बेहतरीन अनुदित कवितायेँ — प्रकाश के रे table td{ vertical-align: top; padding: 5px; border: .3px solid gray; text-align: left;} Poem of Bertolt Brecht in Hindi, translation: Prakash K Ray 1 बर्तोल्त ब्रेष्ट:जैसे कोई ज़रूरी ख़त लेकर आता है डाकख़ाने देर सेखिड़की बंद हो चुकी

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अगर कोई तुम्हें बादल देता है / तो मैं बारिश दूँगा — प्रकाश के रे द्वारा अनुदित कवितायेँ

एक-से-बढ़कर-एक: बेहतरीन अनुदित कवितायेँ — प्रकाश के रे table td{ vertical-align: top; padding: 5px; border: .3px solid gray; text-align: left;} Poem of Bertolt Brecht in Hindi, translation: Prakash K Ray 1 बर्तोल्त ब्रेष्ट:जैसे कोई ज़रूरी ख़त लेकर आता है डाकख़ाने देर सेखिड़की बंद हो चुकी

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रामचरितमानस में नपुंसक — देवदत्त पट्टनायक | अनुवाद: भरत आर तिवारी

और इस तरह युद्ध की तैयारी शुरू होती है — देवदत्त पट्टनायक अनुवाद: भरत आर तिवारी तुलसीदास की रामचरितमानस में एक चौपाई की दो पंक्तियाँ है, जिन्हें वक़्त बेवक़्त दोहराया जा रहा होता है—    ‘ढोल  गवाँर  शूद्र  पशु  नारी।    सकल ताड़ना के अधिकारी॥

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जल भंडारण के आँकड़ों की कवायद

जल भंडारण के आँकड़ों की कवायद editorial Thu, 07/19/2018 – 18:28 Author हिमांशु ठक्कर, भीम सिंह रावत Source सैंड्रप भाखड़ा ब्यास प्रबंध बोर्ड यह लेख भारत के विभिन्न जलाशयों में जल उपलब्धता के बारे में की जा रही रिपोर्टिंग के तरीके पर केन्द्रित है जिसमें

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कई बार देखना, संजू —अशोक चक्रधर | #Sanju @ChakradharAshok @duttsanjay @RajkumarHirani

रणवीर ने निर्देशक-दृष्टि से अभिनय किया और वह संजू के अंदर के दस-बीस आदमियों के अंदर सफलता से चला गया —अशोक चक्रधर चौं रे चम्पू! चौं रे चम्पू! सुनी ऐ, तू आजकल्ल डबल रोल की फिलम बनाय रह्यौ ऐ? राजू हीरानी एक समाज-मनोवैज्ञानिक हैं डबल

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कई बार देखना, संजू —अशोक चक्रधर | #Sanju @ChakradharAshok @duttsanjay @RajkumarHirani

रणवीर ने निर्देशक-दृष्टि से अभिनय किया और वह संजू के अंदर के दस-बीस आदमियों के अंदर सफलता से चला गया —अशोक चक्रधर चौं रे चम्पू! चौं रे चम्पू! सुनी ऐ, तू आजकल्ल डबल रोल की फिलम बनाय रह्यौ ऐ? राजू हीरानी एक समाज-मनोवैज्ञानिक हैं डबल

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न्याय काल का सवाल नहीं अधिकार और हक है — कविता का कुलीनतंत्र (4) — उमाशंकर सिंह परमार

बहुत से कवि ऐसे भी हैं जो न तो महानगरीय कुलीनता से मुक्त हुए न ही अपने जातीय सवर्णवादी संस्कारों से मुक्त हुए मगर अपने आपको “वाम” कहने का दुराग्रह भी रखते हैं। //pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); //pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});

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पुरस्कार सब कुछ नहीं होते — कविता का कुलीनतंत्र (3) — उमाशंकर सिंह परमार

भाग-3: सत्ता और पूँजी के संरक्षण में विकसित जमीन से विस्थापित कविता का कुलीनतंत्र — उमाशंकर सिंह परमार यह समय विज्ञापन और प्रचार और समझौतों की राजनीति का है जमीन में रहने वाले पद विहीन, पोजीशन विहीन, गाँव और कस्बे के एक्टिविस्ट लेखन को हासिए