बेबाक राय

प्रज्वलंत

दर्शन

सरकार एवं सरोकार

सम्राट का सपना 

Browse By

एक सम्राट का युवा पुत्र बीमार पड़ा। एक ही बेटा था उसका, वही मरण-शय्या पर पड़ा था। चिकित्सकों ने कहा था कि बचने की कोई उम्मीद नहीं है। उस रात ही उसका दीया बुझ जायेगा, ऐसी संभावना थी।सम्राट रात भर जागता बैठा रहा। सुबह भोर होते-होते उसकी झपकी लग गयी। सम्राट अपनी कुर्सी पर बैठा ही बैठा पांच बजे के करीब सो गया। सोते ही भूल गया उस बेटे को, जो सामने खाट पर बीमार पड़ा था; जो उस महल, उस राज्य का मालिक था।एक सपना आना शुरू हुआ। उस सपने में उसने देखा कि सारी पृथ्वी का मैं मालिक हूं। बारह बेटे हैं उसके, बहुत सुंदर, स्वर्ण जैसी काया है उनकी, बहुत स्वस्थ, बहुत बुद्धिमान। सारी पृथ्वी पर फैला हुआ है राज्य, स्वर्ण के महल हैं उसके पास, हीरे-जवाहरातों की सीढ़ियां हैं, वह अति आनंद में है।और तभी इस बाहर लेटे हुए बेटे की सांस टूट गयी। पत्नी छाती पीटकर रोने लगी। रोने से नींद खुल गयी सम्राट की। आंख खोलकर वह उठा। खो गये वे सपने के स्वर्ण महल, खो गये वे बारह बेटे, खो गया वह चक्रवर्ती का बड़ा राज्य! देखा तो बाहर बेटा मर चुका है, पत्नी रोती है। लेकिन उसकी आंखों में आंसू नहीं आये, होठों पर हंसी आ गयी उस सम्राट के!पत्नी कहने लगी, क्या तुम्हारा मन विक्षिप्त हो गया? क्या तुम पागल हो गये हो? बेटा मर गया है और तुम हंस रहे हो!वह सम्राट कहने लगा, मुझे हंसी किसी और बात से आ रही है। मैं इस चिंता में पड़ गया हूं कि किन बेटों के लिए रोऊं? अभी-अभी बारह मेरे बेटे थे, सोने के महल थे, बड़ा राज्य था। तू रोई और वह मेरा सारा राज्य छिन गया, मेरे वे बेटे छिन गये! आंख खोलता हूं, तो वे सब खो गये हैं!और यह बेटा, जब तक आंख बंद थी, खो गया था। मुझे याद भी नहीं था कि मेरा कोई बेटा है, जो बीमार पड़ा है। जब तक वे बारह बेटे थे, इस बेटे की कोई याद नहीं थी! और अब जब यह बेटा दिखायी पड़ रहा है, तब वे बारह बेटे खो गये हैं! अब मैं सोचता हूं कि मैं किसके लिए रोऊं? उन बारह बेटों के लिए, उन स्वर्ण-महलों के लिए, उस बड़े राज्य के लिए या इस बेटे के लिए?और मुझे हंसी इसलिए आ गयी कि कहीं दोनों ही सपने तो नहीं हैं– एक आंख बंद का सपना और एक खुली आंख का सपना। क्योंकि जब तक आंख बंद थी, वह भूल गया था! और जब आंख खुली तो, वह जो आंख बंद में दिखाई पड़ा था, वह भूल गया!एक सपना है, जो हम आंख बंद करके देखते हैं और एक सपना है, जो हम आंख खोलकर देखते हैं! लेकिन वे दोनों ही सपने हैं।

ओशो

55 total views, 1 views today

भारत को बेहतर समझने और हमारी परम्पराओं को देश दुनिया तक पहचाने के हमारे इस प्रयास को प्रोत्साहित करें और हमारा छोटा सा सहयोग करें

अगर आपको यह लेख उपयोगी लगा तो अपने मित्रों के साथ सोशल मीडिया और WhatsApp पर शेयर कर हमारी सहायता करें

If you found the post useful please share it with your friends on social media and whatsapp

इस लेख पर अपने विचार दें....

%d bloggers like this: