बेबाक राय

प्रज्वलंत

दर्शन

सरकार एवं सरोकार

सफर में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो

Browse By

सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो
सभी हैं भीड़ में तुम भी निकल सको तो चलो

इधर उधर कई मंज़िल हैं चल सको तो चलो
बने बनाये हैं साँचे जो ढल सको तो चलो

किसी के वास्ते राहें कहाँ बदलती हैं
तुम अपने आप को ख़ुद ही बदल सको तो चलो

यहाँ किसी को कोई रास्ता नहीं देता
मुझे गिराके अगर तुम सम्भल सको तो चलो

यही है ज़िन्दगी कुछ ख़्वाब चन्द उम्मीदें
इन्हीं खिलौनों से तुम भी बहल सको तो चलो

हर इक सफ़र को है महफ़ूस रास्तों की तलाश
हिफ़ाज़तों की रिवायत बदल सको तो चलो

कहीं नहीं कोई सूरज, धुआँ धुआँ है फ़िज़ा
ख़ुद अपने आप से बाहर निकल सको तो चलो

60 total views, 1 views today

अगर आपको यह लेख उपयोगी लगा तो अपने मित्रों के साथ सोशल मीडिया और WhatsApp पर शेयर कर हमारी सहायता करें

If you found the post useful please share it with your friends on social media and whatsapp

इस लेख पर अपने विचार दें....

%d bloggers like this: