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पुरस्कार सब कुछ नहीं होते — कविता का कुलीनतंत्र (3) — उमाशंकर सिंह परमार

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भाग-3: सत्ता और पूँजी के संरक्षण में विकसित जमीन से विस्थापित कविता का कुलीनतंत्र
— उमाशंकर सिंह परमार

यह समय विज्ञापन और प्रचार और समझौतों की राजनीति का है

जमीन में रहने वाले पद विहीन, पोजीशन विहीन, गाँव और कस्बे के एक्टिविस्ट लेखन को हासिए पर धकेलने के लिए “दिल्ली” ने पुरस्कारों का मायाजाल बिछाया और अतार्किक व अवैचारिक असंगत लेखन का गुणगान करते हुए कवियों को मुक्ति का मार्ग दिखाया। 

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पुरस्कार यदि अमर बनाते होते तो निराला, विजेन्द्र, जैसे कवि परम्परा में नहीं स्थापित हुए होते और केदारनाथ सिंह, कुँवर नारायण परम्परा से बाहर न हुए होते। — उमाशंकर सिंह परमार | फ़ोटो (c) भरत आर तिवारी

जब हम पीछे छूट चुके स्मृतियों में दर्ज लोक को अपने रचनाकर्म का आधार बनाते हैं तो दो प्रकार का छल करते हैं। पहला छल है अपने वर्तमान को अस्वीकार करते हैं और दूसरा छल स्मृतिपरक लोक का मिथ्या चित्रण करते हैं। कविता में कवि के व्यक्तित्व को होने के लिए जरूरी नहीं कि हम आयातित और आभासी लोक की बात करें जिस जमीन में हैं वहीं का बिम्ब रखें। मगर जीतेन्द्र ऐसा नहीं कर पाते हैं। वह वर्तमान का घोर विरोध करते हैं। यही कारण है उनकी कविताएँ अपरिपक्व और कच्ची हैं। कभी कभी प्रतीत होता है जैसे बच्चों ने किसी प्रतियोगिता के लिए लिखा हो। उनकी एक कविता उदाहरण के रूप में देना चाहूँगा ‘कायान्तरण’। यह ‘कायान्तरण’ कविता संग्रह की शीर्षक कविता है। यहाँ दिल्ली के लोक में एक चरवाहे को भेज दिया गया है और चरवाहे का विस्तार से वर्णन करने की बजाय, दिल्ली की पूँजीवादी शोषक मनोवृत्ति को उजागर करने की बजाय “सपनों” को अपरिभाषित करते हुए, कविता में घृणा के स्तर तक लोक से चुने गये नेताओं की आलोचना कर दी गयी है। यह कवि की अभिजात्य और लोकविरोधी मनोवृत्ति है कि गाँव जवार के लोग दिल्ली आते हैं तो केवल “सपने” पूरा करने के लिए या नेतागिरी करने के लिए। भूख और पीड़ा का उल्लेख नहीं करते। भूख से मर रहा आदमी दिल्ली केवल रोटी की आस से जाता है न कि सुख सुविधा भरे सपनों के लिए जाता है। कविता का आरम्भ देखिए –

“दिल्ली के पत्रहीन जंगल में /छाँह ढूँढ़ता /भटक रहा है एक चरवाहा /विकल अवश /उसके साथ डगर रहा है / झाग छोड़ता उसका कुत्ता” 

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कविता का कुलीनतंत्र — 2         कविता का कुलीनतंत्र — 4
(ये लेखक के अपने विचार हैं।)

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