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आखिर मृत्यु क्या है? आओं विचार करें।

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swatantra pathakआखिर मृत्यु क्या है?

मृत्यु है,
जीवन की वेदना से शान्ति की औषधि,
भविष्य के सपने पूरा ना कर पाने की कसक,
संघर्ष के मैदान को छोड़कर चुपचाप बैठ जाना,
अन्यायी के खिलाफ युद्ध हुंकार ना छेड़ पाना,

क्या है ये मृत्यु चलों विचार करें।

मृत्यु है,
एक ध्रुव सत्य है जो सबको हमेशा आती है,
एक भयंकर दर्द है जिसकी चिन्ता कायरों को सताती है,
आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का पुल है,
जीवन चक्र के समापन और प्रारंभ का मूल है।

मृत्यु मित्र है या शत्रु आओं विचार करें।

समग्र पीड़ा का अंत कर एक नयी शुरूआत देने वाली,
टूट चुके सपनों, बिछड़ चुके अपनों की व्यथा को भुलाने वाली,
जीवन के सत्य से परिचित करा ईश्वर को याद दिलाने वाली,
पल प्रतिपल दहकते अंगारों के साथ शरीर को जलाने वाली।

मृत्यु का चिन्तन क्या जीवन का चिन्तन है?

दिखता यहाँ जो वो प्रतिपल बदलता जा रहा है,
बालक होता युवा और युवा होकर वृद्ध मर जा रहा है,
जीवन जीने की सोच रखने वाला मृत्यु से भय खा रहा है,
जो भयभीत नहीं मृत्यु से वो जीवन जीये जा रहा है।

स्व० स्वतंत्र कुमार पाठक

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