दोपहर के लगभग दो बजे थे, खाना खाने बैठा ही था की अकस्मात ही टीवी पर एक न्यूज़ फ़्लैश होती है की सुशांत सिंह राजपूत ने खुदखुशी कर ली | कुछ पलों के लिए तो यकीन नहीं हुआ , फिर जब यह खबर हर चैनल पर चलने लगी तो समझ आया यह हकीकत है|

तनाव के उन क्षणों में मजबूत लोग भी आत्महत्या कर लेते हैं, वो लोग जिनके पास सब कुछ है शान, शौकत, रुतबा, पैसा इनमें से कुछ भी उन्हें नहीं रोक पाता, तो फिर क्या कमी रह जाती है ?

अवसाद क्या है?

सबसे पहले जरूरत है अवसाद को समझने की| यह एक गहरी उदासी की भावना है जो हमारे अंतर्मन का हिस्सा बन जाती है| अंतर्मन इसलिए क्योंकि हो सकता है की यह उदासी स्पष्ट रूप से हमारे स्वाभाव में ना झलके परन्तु हमारे नजरिये, सोचने के तरीके और निश्चय ही हमारे स्वाभाव में परिवर्तन आता जरूर है|

इस उदासी की भावना के कारण हम किसी भी एक्टिविटी में हिस्सा लेना नहीं चाहते हैं, उनमें भी नहीं जिनमे सामन्यतः हमारी रुचि रहती है| हम अकेले रहना चाहते है| सामाजिक मेलजोल पसंद नहीं आता | और सबसे नकारत्मक बात हम इस परिस्थिति से निकलना नहीं चाहते|

अवसाद के क्या लक्षण हैं?

अवसाद को समझना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि यह अदृश्य है। यह विकार विचारों, व्यवहारों, और भावनाओं द्वारा परिभाषित होता है बजाय स्पष्ट लक्षण जैसे उल्टी या बुखार। अक्सर हमारे जानने वाले और करीबी भी इन लक्षणों को अनदेखा कर देते हैं, जैसे -“बस उठो और कुछ करो “| अधिकतर मामलों में तो खुद अवसाद से गुजर रहा व्यक्ति भी इसे समझ नहीं पाता|

यह समझने के लिए कि वास्तव में अवसाद क्या है हमें लक्षणों के बारे में बात करने की आवश्यकता है।

प्रथम सबसे पहले अवसाद के लक्षणों का सम्बन्ध इस बात से है की किसी को कैसा लगता है या कोई कैसा महसूस कर रहा है। इन लक्षणों में शामिल हैं दुःख, क्रोध,अपराध बोध, या निराशा की लगभग निरंतर भावनाएँ ।

अगला, लक्षण हैं व्यवहार से संबंधित। वे सामाजिक मेलजोल से बचने लगते हैं, ऊर्जा की कमी, कम प्रेरणा, खराब एकाग्रता, नींद की समस्या, या भूख में महत्वपूर्ण परिवर्तन।

अंत में, विचारों से संबंधित लक्षण आत्मसम्मान की भावना में कमीं, आत्महत्या के विचार और नियमित गतिविधियों में रुचि की हानि शामिल हैं ।

अवसाद मूड में परिवर्तन या बोरीअत की तरह नहीं है, जो थोड़ी देर बाद बदल जाये| यह हफ़्तों बना रहता है, शायद महीनों या कई बार तो सालों भी|  साथ ही यह कुछ अंतराल के बाद उभर भी सकता है| बहुतों को हम में से, यह निर्णय की तरह लग सकते हैं। यह ऐसा लगता है कि उदास है, किसी ने फैसला किया है, आलसी होना और पूरे दिन सोना, या दोस्तों के साथ समय बिताना बंद करने का फैसला किया या फिर उसका बुरा रवैया है। लेकिन याद रखें: जो हमारे सिर में है वह काल्पनिक नहीं है। हमारे विचार, भावनाओं और व्यवहारों से प्रभावित होते हैं हमारे दिमाग में रसायनों की एक जटिल श्रृंखला।

वास्तव में अवसाद कैसा महसूस होता है?

दीपिका पादुकोण का कहना है की रणबीर कपूर से ब्रेकअप के बाद वह अवसाद से गुजर रहीं थीं|

दीपिका पादुकोण ने अपने एक इंटरव्यू में कहा, “मेरे लिए इस यात्रा में सबसे कठिन हिस्सा समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या महसूस कर रही थी।”

उन्होंने कहा, “जो शब्द अवसाद के मेरे अनुभव का सबसे अच्छा वर्णन करता है, वह संघर्ष है। हर पल संघर्ष था। मैंने पूरे समय यही महसूस किया।”

अवसाद से गुजर रहे मोहित (नाम काल्पनिक) अपनी भावनाओं को बताते है|

MOHIT: मैं किसी का सामना नहीं करना चाहता था;
मैं किसी से बात नहीं करना चाहता था मैं वास्तव में अपने लिए कुछ नहीं करना चाहता था
क्योंकि मुझे ऐसा लगा, मुझे ऐसा लगा मैं इतना भयानक व्यक्ति था कि मेरे लिए खुद के लिए कुछ भी करने का कोई वास्तविक कारण नहीं है।

मैं वास्तव में एक मिनट भी बैठ कर ऐसा कोई काम नहीं कर सकता था जिसके लिए एकाग्रता की जरूरत हो।

मैंने कोई पुस्तक नहीं पढ़ पता था, मैं मुश्किल से क्लास में गया। मैं घर से बाहर नहीं निकलता था| मैं कॉलेज में था इसलिए मैं कक्षाओं में बिल्कुल नहीं जाता था। मेरा वजन बहुत बढ़ गया|

यह खुद से एक संघर्ष था, निरंतर और लगातार|

क्या अवसाद और चिंता समान हैं?

भ्रम का एक प्रमुख श्रोत है, उदास लगना और अवसाद के बीच का फर्क ना समझ पाना| लगभग सभी लोग परिस्थितिवश उदास होते हैं| परीक्षा में ख़राब प्रदर्शन, नौकरी में दिक्कत, पारिवारिक चिंता अनेको कारण हो सकते हैं, या फिर कभी कभी बिना किसी कारण जैसे दिनचर्या से ऊब जाना आदि वजहों से मनुष्य उदास महसूस कर सकता है| परन्तु परिस्थतियों के बदलने के साथ ही यह उदासी चली जाती है| अवसाद इससे अलग है, यह एक चिकित्सा विकार है,और यह दूर नहीं जाएगा सिर्फ इसलिए कि आप इसे दूर करना चाहते हैं। यह कम से कम लगातार दो हफ़्तों तक बना रहता है और आपके व्यवहार , सोच और समाजीकरण को बुरी तरह प्रभावित करता है|

उदासी और अवसाद में सबसे बड़ा अंतर यह है की जब आप उदास होते है तो अपना मूड बदलने के लिए अपने दोस्तों से मिलना चाहते हैं, परिवार के साथ समय बिताना चाहते हैं या किसी नयी जगह जाना चाहते है| मगर जब अप अवसाद में होते हैं तो आप किसी से मिलना नहीं चाहते, आपका मन इतनी घोर निराशा से घिर जाता है की आप इससे निकलना भी नहीं चाहते|

क्या अवसाद ठीक हो सकता है?

अवसाद का इलाज जटिल जरूर है पर संभव है|थोड़ा धैर्य चाहिए, सबकुछ ठीक हो जायेगा| मगर आवश्यकता है सही समय पर चिकित्सकीय परामर्श की| इसे हलके में ना लें यह केवल एक विचार नहीं है बल्कि प्रमाणिक रूप से बिमारी है|

अवसाद, कहाँ मदद खोजें?

अवसाद के इलाज के बारे में अच्छी बात यह है की अवसाद को स्वीकार कर लेने और इसके इलाज की पहल कर लेने मात्र से सुधार दिखने लगता है| ऐसे समय में चाहिए एक व्यक्ति जो आपके दर्द को सुन सके| जिससे आप अपनी समस्याएं बाँट सकें| अगर एक बार अपने मान लिया की आपको मदद की आवश्यकता है तो फिर मदद बहुत दूर नहीं है|

क्या डिप्रेशन आपको बेहतर बना सकता है?

वैसे अवसाद का एक सकारत्मक पहलु भी है|

समाजीकरण में कमी के कारण आप ज्यादा एकाग्रचित होकर कार्य कर सकते है| अक्सर ऐसा देखा गया है की संगीतकार , शायर, पेंटर , लेखक आदि जैसे कलाकार अपनी सर्वोत्तम रचनाएँ अपने घोर निराशा के काल में ही करते है| अवसाद का समय आपको अपने सच्चे दोस्तों की पहचान करने में भी मदद कर सकता है| परन्तु इसके अपने रिस्क हैं|

कब अवसाद आपके जीवन को बर्बाद कर देता है?

अवसाद एक ‘विसीयस साइकिल’ अर्थात दुश्चक्र का निर्माण करता है, जिसमें आप लोगो से मिलना नहीं चाहते क्योंकि आप दुखी महसूस करते है, और आप दुखी महसूस करते हैं क्योंकि आप लोगों से मिलते नहीं| जब आप इस दुष्चक्र में फास जाते है तब अवसाद आपका जीवन बर्बाद कर सकता है|जरूरत है तो इस दुष्चक्र को तोड़ने की|

अवसाद क्यों बढ़ रहा है?

अवसाद एकाकी जीवन शैली जिसमें हम जीवन की सभी उपलब्धियों को आर्थिक पैमानें पर तौलते जा रहें हैं, के कारण बढ़ता जा रहा है| व्यस्त जीवन शैली के कारण परिवार और दोस्तों के लिए वक़्त कम होता जा रहा है|ऐसे में जीवन के संघर्ष में व्यक्ति अपने को अक्सर अकेला पता है | ऐसे ही नाजुक पलों में अवसाद उसके मन और मस्तिष्क में अपना घर बना लेता है|

चलते चतले एक कहानी-

एक बहुत ही शानदार लड़का था, उसने हमेशा विज्ञान में 100% स्कोर किया। IIT मद्रास के लिए चयनित हुए और IIT में उत्कृष्ट स्कोर किया।एमबीए के लिए कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय गए। अमेरिका में उच्च वेतन वाली नौकरी मिली और वहीं बस गए। एक खूबसूरत तमिल लड़की से शादी की। 5 कमरे का बड़ा घर और लग्जरी कारें खरीदीं।

उसके पास वह सब कुछ था जो उसे सफल बनाता है लेकिन कुछ साल पहले उसने अपनी पत्नी और बच्चों को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी।

क्या गलत हुआ?

कैलिफोर्निया के नैदानिक ​​मनोविज्ञान संस्थान ने उनके मामले का अध्ययन किया और पाया कि “क्या गलत हुआ?” शोधकर्ता ने लड़के के दोस्तों और परिवार से मुलाकात की और पाया कि उसने अमेरिका के आर्थिक संकट के कारण अपनी नौकरी खो दी और उसे लंबे समय तक नौकरी के बिना बैठना पड़ा। अपनी पिछली वेतन राशि को कम करने के बाद भी उन्हें कोई नौकरी नहीं मिली। फिर उसकी घर की किस्त टूट गई और वह और उसका परिवार का घर खो बैठे।

वे कम पैसे के साथ कुछ महीनों तक जीवित रहे और फिर उन्होंने और उनकी पत्नी ने एक साथ आत्महत्या करने का फैसला किया। उसने पहले अपनी पत्नी और बच्चों को गोली मारी और फिर खुद को भी गोली मार ली।

मामले ने निष्कर्ष निकाला कि इस आदमी को सफलता के लिए प्रोग्राम किया गया था लेकिन असफलताओं से निपटने के लिए उसे प्रशिक्षित नहीं किया गया था।

अब आइए वास्तविक प्रश्न पर आते हैं।

अत्यधिक सफल लोगों की आदतें क्या हैं?

सबसे पहले, याद रखें कि यदि आपने सब कुछ हासिल कर लिया है, तो सब कुछ खो देने की सम्भावना है, किसी को नहीं पता कि अगला आर्थिक संकट दुनिया में कब आएगा।

कृपया खुद को और अपने बच्चों को सिर्फ सफल होने के लिए प्रोग्राम न करें, लेकिन असफलताओं से निपटना सीखें और जीवन के बारे में उचित सबक भी सीखें।

उच्च-स्तरीय विज्ञान और गणित सीखने से हमें प्रतियोगी परीक्षाओं को पास करने में मदद मिलेगी लेकिन जीवन के बारे में ज्ञान ही हमें हर समस्या का सामना करने में मदद करेगा।

“सफलता एक आलसी शिक्षक है। असफलता आपको अधिक सिखाती है।”

और हाँ लेख के आरम्भ में हमने सवाल किया था की – “तो फिर क्या कमी रह जाती है ?”

तो जवाब प्रस्तुत है|

कमी रह जाती है उस ऊँचाई पर, एक अदद दोस्त की; कमी होती है  उस मुकाम पर एक अदद राजदार की; एक ऐसे दोस्त की जिसके साथ “चांदी के कपों” में नहीं किसी छोटी सी चाय के दुकान पर बैठ सकते, जो उन्हें बेतुकी बातों से जोकर बन कर  हंसा पाता, वह जिससे अपनी दिल की बात कह हल्के हो सके, वह जिसको देखकर अपना स्ट्रेस भूल सके|

जो सफ़लता या असफ़लता के तराज़ू में बिना तौले हमारे साथ वक़्त बिता सके| यह बात जिस हलके फुल्के अंदाज़ में कही गयी है, उतनी हलकी फुलही है नहीं|

अगर आपके पास वह दोस्त है वह यार है तो कीमत समझिये उसकी, चले जाइए एक शाम उसके साथ चाय पर जिंदगी बहुत हसीन बन जाएगी | याद रखिए आपके तनाव से यदि कोई लड़ सकता है तो वो है आपका दोस्त आपका परिवार और उनके साथ की एक कप गर्म चाय !!!

सभी दोस्तों को समर्पित ।