केन्द्रीय विद्यालय मेघाहातुबुरु की वर्ग आठ वीं कक्षा की छात्रा सुष्मिता साहू अपनी बेहतर पेंटिंग के बदौलत काफी सुर्खियां बटोर रही है. सुष्मिता पढ़ाई में भी अव्वल हैं. कावी कला में काफी कम उम्र में इसने महारथ हासिल कर ली है. कावी कला कोंकण क्षेत्र में विशेष रूप से गोवा के मंदिरों, तटीय महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में पाए जाने वाले भित्ति चित्रों का एक रूप है. कावी भित्ति चित्र पुराने घरों, छोटे मंदिरों में भी देखे जा सकते हैं.

सुष्मिता साहू द्वारा बनाई गई कावी कला पेंटिंग.

सुष्मिता अपनी इस कला व पेंटिंग की बदौलत अनेक पुरस्कार प्राप्त कर चुकी है. उसकी पेंटिंग लगातार सुर्खियां बटोर रही है. पेंटिंग देखने में एेसा लगता है कि मानो कम्प्यूटर से इसे बनाया गया हो. सुष्मिता के पिता सरस कुमार साहू सेल की मेघाहातुबुरु लौह अयस्क खदान में बतौर सहायक महाप्रबंधक हैं. उन्होंने बताया की बेटी को कला व पेंटिंग से गहरा प्रेम है. वह छोटी उम्र से हीं पेंटिंग बनाते आ रही है.

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