वो मुगल बादशाह जो चलवाए थे राम-सीता की तस्वीर वाले सोने के सिक्के, बन गया था ‘राम भक्त’..

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जब कभी भी आप मुगल शासकों (Mughal Ruler) की चर्चा करते है, या उनके बारे में पढ़ते है तो युद्ध करने, शासन करने और क्रूरता के लिए जाने जाते है, लेकिन शायद आपको नही पता होगा की मुगल साम्राज्य (Mughal Empire) का एक बादशाह ऐसा भी था जो एक महान बादशाह होने के साथ साथ हर एक धर्म को बराबर इज्जत देने वाला शासक भी था। इस बादशाह ने हिंदू मंदिरों के साथ साथ राम(Ram)और सीता(Sita)माता की तस्वीर वाले सिक्के”राम टका” भी चलवाए थे।

13 साल की उम्र में मिली राज गद्दी

आपको बता दें कि बादशाह हुमायूं (Humayun Mughal Emperor) के निधन के बाद उनके पुत्र अकबर को 13 साल की ही उम्र में राजगद्दी संभाली पड़ी। अकबर(Akbar Mughal Emperor) एक ऐसा शासक बना जिसने हर धर्म से प्यार किया।

उन्होंने (Akbar Mughal Emperor) हिंदुओं के लिए जगह-जगह पर हिंदू मंदिर के साथ-साथ वह (Akbar Mughal Emperor) हर धर्म को एक साथ लेकर चलना चाहते थे। अकबर (Akbar Mughal Emperor) ने अपने शासन काल में भगवान राम (Ram)और माता सीता(Sita)की तस्वीर वाली सोने और चांदी की मुहरें (Coins) जारी किये गए. गोल और चौकोर आकार के इन सिक्कों(Coins)”राम टका”पर एक तरफ राम-सीता की तस्वीर और दूसरी तरफ उर्दू में “अमदाद इलाही-50” दर्ज था.

अब कहां है “राम टका” मुहर

अकबर के शासनकाल के बाद आखिर अब वह सिक्के “राम टका” कहां है चलिए इसके भी जानकारी हम आपको देते हैं, आपको बता दे कि अब कुछ गिनती के सिक्के”राम टका” ही बचे हुए हैं कुछ सिक्के बनारस के बीएचयू (BHU) में भारत कला भवन संग्रहालय के पास संरक्षित हैं, वही एक चांदी और दो सोने के सिक्के (Coins) इंग्लैंड के क्लासिकल न्यूमेसमेटिक ग्रुप (Classical Numismatic Group) के पास हैं.

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