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क्या पीएम मोदी ने अपनी हार स्वीकार कर ली है ?

30 मई को पीएम नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्र के नागरिकों के नाम संदेश प्रस्तुत किया इस संदेश में वैसे तो वह राष्ट्र के नागरिकों को हिम्मत बढ़ाते हुए नजर आते हैं मगर संदेश पर गौर किया जाए तो ऐसा लगता है कि वह अपनी सरकार की नाकामी की सफाई दे रहे हैं | अपने संदेश में पीएम मोदी ऐसा कहते हुए लगते हैं कि वर्तमान परिस्थिति के अनुसार उनकी सरकार का मूल्यांकन ना किया जाए , बल्कि वह अपनी पिछली उपलब्धियों को गिनाते हुए दिखते हैं| ऐसा लग सकता है या ऐसा कोई कह सकता है कि अपनी दूसरे कार्यकाल के पहले वर्षगांठ पर वह अपनी सरकार की उपलब्धियां गिना रहे परंतु उन्होंने अपने सिर्फ 1 वर्ष के कार्यकाल की उपलब्धियां ही नहीं नहीं बल्कि अपने पहले कार्यकाल के भी कामों को गिनाया अतः आसानी से कहा जा सकता है कि पीएम मोदी असल में अपने संदेश में एक बचाव की मुद्रा में है|

पीएम मोदी की मुद्रा को उनकी शैली और भाषा को देखकर इस बात का आकलन लगाना कोई कठिन नहीं है कि वह अपनी सफाई पेश कर रहे हैं | अपनी सरकार की नाकामी का जनक परिस्थितियों को बताने की कोशिश कर रहे हैं और यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि उनका मूल्यांकन, उनके सरकार का मूल्यांकन उनकी वर्तमान कार्यशैली के अनुसार ना किया जाए| वैसे अगर देखा जाए तो दुनिया भर की सरकारों के ऊपर ऐसा संकट आया हुआ है पीएम मोदी इस मामले में कोई अपवाद नहीं है परंतु ऐसे मौकों पर भी जनता के सामने स्पष्ट बात ना करना एक अच्छा संदेश नहीं देता | आइए हम देखते हैं कि पीएम मोदी ने अपनी इस पत्र में राष्ट्र के नागरिकों के नाम कौन-कौन सी बातें कहीं उन सबका एकसार देखते हैं-

वर्ष 2014 में देश की जनता ने देश में एक बड़े परिवर्तन के लिए वोट किया था, देश की नीति और रीति बदलने के लिए वोट किया था। उन पांच सालों में देश ने व्यवस्थाओं को जड़ता और भ्रष्टाचार के दलदल से बाहर निकलते हुए देखा है। उन पांच सालों में देश ने अंत्योदय की भावना के साथ गरीबों का जीवन आसान बनाने के लिए सरकारी व्यवस्था को परिवर्तित होते देखा है। वह कार्यकाल देश की अनेकों आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए समर्पित रहा।

साल 2019 में देश की जनता का आशीर्वाद देश के बड़े सपनों के लिए था, आशाओं-आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए था। इस एक साल में लिए गए फैसले इन्हीं बड़े सपनों की उड़ान हैं। आज जन-जन से जुड़ी जन-मन की जनशक्ति, राष्ट्रशक्ति की चेतना को प्रज्वलित कर रही है। गत एक वर्ष में देश ने सतत नए स्वप्न देखे, नए संकल्प लिए और इन संकल्पों को सिद्ध करने के लिए निरंतर निर्णय लेकर कदम भी बढ़ाए।

देश के इतिहास में यह भी पहली बार हुआ है जब, किसान, खेतिहर मजदूर, छोटे दुकानदार और असंगठित क्षेत्र के श्रमिक साथियों, सभी के लिए 60 वर्ष की आयु के बाद तीन हजार रुपये की नियमित मासिक पेंशन की सुविधा सुनिश्चित हुई है। मछुआरों की सहूलियत बढ़ाने के लिए, उनको मिलने वाली सुविधाएं बढ़ाने और ब्लू इकोनॉमी को मजबूत करने के लिए विशेष योजनाओं के साथ-साथ अलग से विभाग भी बनाया गया है। 

पहली बार ऐसा हुआ है जब गांव में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वालों की संख्या, शहर में इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों से 10 प्रतिशत ज्यादा हो गई है। देशहित में किए गए इस तरह के ऐतिहासिक कार्यों और निर्णयों की सूची बहुत लंबी है। इस पत्र में सभी को विस्तार से बता पाना संभव नहीं। लेकिन मैं इतना अवश्य कहूंगा कि एक साल के कार्यकाल के प्रत्येक दिन चौबीसों घंटे पूरी सजगता से काम हुआ है,  संवेदनशीलता से काम हुआ है, निर्णय लिए गए हैं।

देशवासियों की आशाओं-आकांक्षाओं की पूर्ति करते हुए हम तेज गति से आगे बढ़ ही रहे थे, कि कोरोना वैश्विक महामारी ने भारत को भी घेर लिया। एक ओर जहां अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं और विशाल अर्थव्यवस्था वाली विश्व की बड़ी-बड़ी महाशक्तियां हैं, वहीं दूसरी ओर इतनी बड़ी आबादी और अनेक चुनौतियों से घिरा हमारा भारत है। कई लोगों ने आशंका जताई थी कि जब कोरोना भारत पर हमला करेगा, तो भारत पूरी दुनिया के लिए संकट बन जाएगा।

निश्चित तौर पर, इतने बड़े संकट में कोई ये दावा नहीं कर सकता कि किसी को कोई तकलीफ और असुविधा न हुई हो। हमारे श्रमिक साथी, प्रवासी मजदूर भाई-बहन, छोटे-छोटे उद्योगों में काम करने वाले कारीगर, पटरी पर सामान बेचने वाले, रेहड़ी-ठेला लगाने वाले, हमारे दुकानदार भाई-बहन, लघु उद्यमी, ऐसे साथियों ने असीमित कष्ट सहा है। इनकी परेशानियां दूर करने के लिए सभी मिलकर प्रयास कर रहे हैं।

इन परिस्थितियों में, आज यह चर्चा भी बहुत व्यापक है कि भारत समेत तमाम देशों की अर्थव्यवस्थाएं कैसे उबरेंगी? लेकिन दूसरी ओर ये विश्वास भी है कि जैसे भारत ने अपनी एकजुटता से कोरोना के खिलाफ लड़ाई में पूरी दुनिया को अचंभित किया है, वैसे ही आर्थिक क्षेत्र में भी हम नई मिसाल कायम करेंगे। 130 करोड़ भारतीय, अपने सामर्थ्य से आर्थिक क्षेत्र में भी विश्व को चकित ही नहीं बल्कि प्रेरित भी कर सकते हैं।

आज समय की मांग है कि हमें अपने पैरों पर खड़ा होना ही होगा। अपने बलबूते पर चलना ही होगा और इसके लिए एक ही मार्ग है – आत्मनिर्भर भारत। अभी हाल में आत्मनिर्भर भारत अभियान के लिए दिया गया 20 लाख करोड़ रुपए का पैकेज, इसी दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम है। यह अभियान, हर एक देशवासी के लिए, हमारे किसान, हमारे श्रमिक, हमारे लघु उद्यमी, हमारे स्टार्टअप्स से जुड़े नौजवान, सभी के लिए, नए अवसरों का दौर लेकर आएगा।

मेरे संकल्प की ऊर्जा आप ही हैं, आपका समर्थन, आपका आशीर्वाद, आपका स्नेह ही है। वैश्विक महामारी के कारण, यह संकट की घड़ी तो है ही, लेकिन हम देशवासियों के लिए यह संकल्प की घड़ी भी है। हमें यह हमेशा याद रखना है कि 130 करोड़ भारतीयों का वर्तमान और भविष्य कोई आपदा या कोई विपत्ति तय नहीं कर सकती। हम अपना वर्तमान भी खुद तय करेंगे और अपना भविष्य भी। हम आगे बढ़ेंगे, हम प्रगति पथ पर दौड़ेंगे, हम विजयी होंगे।

हमारे यहां कहा गया है- ‘कृतम् मे दक्षिणे हस्ते, जयो मे सव्य आहितः’ यानी, हमारे एक हाथ में कर्म और कर्तव्य है तो दूसरे हाथ में सफलता सुनिश्चित है। देश की निरंतर सफलता की इसी कामना के साथ मैं आपको पुन: नमन करता हूं। आपको और आपके परिवार को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं। स्वस्थ रहिए, सुरक्षित रहिए। जागृत रहिए, जागरूक रखिए।

2 thoughts on “क्या पीएम मोदी ने अपनी हार स्वीकार कर ली है ?”

  1. JITENDRA YADAV says:

    kuchh nya bhi hai ki bas yahi hai

  2. PAWAN YADAV says:

    💯🙏

Comments are closed.


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